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पृथ्वी के भौगोलिक भू नक्शा की खोज सबसे पहले भारत में की गई

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Map of the Earth Discovered First by India
पृथ्वी के भौगोलिक भू नक्शा की खोज

 

पृथ्वी के भौगोलिक भू नक्शा के बारे में बहुत पहले ही वेद  व्यास जी द्वारा बताया जा चूका है । आइये इसके बारे में जानकारी प्राप्त करें ।

हजारों वर्षों पहले संकलित अगर महभारत काल के वेदव्यास द्वारा रचित एक श्लोक का अध्यन करते हैं तो हमें पता चलता कि पृथ्वी के वर्तमान संरचना के बारे में तो उन्होंने बहुत पहले ही हमें बता दिया था ।
यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि अंग्रेज तथा बामपंथी इतिहासकारों ने हमसे हमारे विकाश, तथा सांस्कृतिक उत्थान से सम्बंधित सभी तथ्यों को छुपाये रखा तथा इसे सम्पूर्णता प्रदान करने से सदैव कतराते रहे।

 

Yes, it is a TRUTH. Maharshi Vedvyash had presented the Map of the Earth during the period of Mahabharat war. The map is shown as above and the below map is the modern one. Just look at the similarities.

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पृथ्वी के भू नक्शा के संबंद्ध में कृपया निम्न लिखित श्लोक पर गौर करें ।

“ सुदर्शनं प्रवक्ष्यामि द्वीपं तु कुरुनन्दन। परिमण्डलो महाराज द्वीपोऽसौ चक्रसंस्थितः॥ यथा हि पुरुषः पश्येदादर्शे मुखमात्मनः। एवं सुदर्शनद्वीपो दृश्यते चन्द्रमण्डले॥ द्विरंशे पिप्पलस्तत्र द्विरंशे च शशो महान्।”

—वेद व्यास, भीष्म पर्व, महाभारत

Let us decode in Hindi what Ved Vyash told about the Map of the Earth.

अर्थात वेद ब्यास जी कहते हैं कि “हे कुरुनन्दन ! सुदर्शन नामक यह द्वीप चक्र की भाँति गोलाकार स्थित है, जैसे पुरुष दर्पण में अपना मुख देखता है, उसी प्रकार यह द्वीप चन्द्रमण्डल में दिखायी देता है। इसके दो अंशो मे पिप्पल और दो अंशो मे महान शश(खरगोश) दिखायी देता है।”

११वीं शताब्दी में रामानुजचार्य द्वारा महाभारत के उपर्युक्त श्लोक को पढ्ने के बाद पृथ्वी का भोगोलिक भू नक्शा बनाया जो ऊपर दिया गया है ।  इस संरचना को कागज पर बनाकर व्यवस्थित करे तो यह हमारी बर्तमान पृथ्वी के मानचित्र से हुबहू मेल खाता हुवा प्रतित होता है।

सरांस यह है कि पृथ्वी का भोगोलिक भू नक्शा वेद व्यास द्वारा महाभारत में हजारों वर्ष पूर्व ही दे दिया गया था। महाभारत में कहा गया है कि यह पृथ्वी चन्द्र.मंडल में देखने पर दो अंशों मे खरगोश तथा अन्य दो अंशों में पिप्पल (पत्तों) के रुप में दिखायी देती है।

Summarily, it can be safely ascertained that thousand years back Maharashi Ved Vyash had already predicted about the Geographical Map of the Earth.

 

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