Explore My India to discover the Mystique of Ancient Foot Prints, different Developmental Mile Stones and Indian Unity with the World Society.

हिन्दू शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई ? : एक सनातनी तार्किक विश्लेषण

पुराणों तथा अन्य ग्रथों में भी कई स्थानों में हिन्दू शब्द का भरपूर उल्लेख मिलता है, आइये हिन्दू शब्द की उत्पत्ति के बारे में कुछ विशेष जानकारी प्राप्त करें।

कुछ अति उत्त्साहित बुद्धजीवी लोग कहते हैं कि हिन्दू शब्द फारसियों की देन है । वो इसके लिए कुतर्क देते हैं कि इसका उल्लेख वेद पुराणों में नहीं है।

ऐसे लोगों को अब किन शब्दों से अलंकृत किया जाय । अरे भाई  सनातन धर्म बहुत ब्यापक है । तुम क्या सोचते हो दो चार शब्द जान लेने या पढ़ लेने मात्र से तुम सनातन धर्म की व्यापकता और विराटता की थाह पा सकोगे कदापि नहीं भूल जाओ ।

कृपया ध्यान दें, यह पोस्ट हिन्दू शब्द की उत्पत्ति तथा उससे सम्बंधित कुतर्को के जबाब के रूप में प्रस्तुत है, अतः इस पोस्ट को जरा ध्यान लगाकर पढ़ें ।

हिन्दू शब्द की उत्पत्ति

ऋग्वेद के ब्रहस्पति अग्यम में हिन्दू शब्द का उल्लेख इस प्रकार आया है…..

“हिमलयं समारभ्य यावत इन्दुसरोवरं । तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थानं प्रचक्षते।।

(इसका मतलब है कि हिमालय से लेकर इंदु सरोवर तक देव निर्मित देश को हिंदुस्तान कहते हैं ।)

सिर्फ वेद ही नहीं, बल्कि शैव ग्रन्थ के मेरूतंत्र में भी इस शब्द की ब्याख्या की गई है, जो इस प्रकार से है…..

“हीनं च दूष्यतेव् हिन्दुरित्युच्च ते प्रिये ।।”

(अर्थात,  जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे ही हिन्दू कहा जाता हैं ।)

hindu-worship

इससे मिलता जुलता लगभग यही श्लोक कल्पद्रुम में भी दोहराया गया है…….

“हीनं दुष्यति इति हिन्दू ।।”

(अर्थात जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे ऐसे ब्यक्ति को हिन्दू कहा जाता है।)

पारिजात हरण में भी हिन्दू शब्द की उत्पत्ति की ब्याख्या की गई है, जो कुछ क्रमशः इस प्रकार से है….

“हिनस्ति तपसा पापां दैहिकां दुष्टं । हेतिभिः श्त्रुवर्गं च स हिन्दुर्भिधियते ।।”

(अर्थात जो अपने तप से शत्रुओं का दुष्टों का और पाप का नाश कर देता है वही हिन्दू है ।)

माधव दिग्विजय में भी हिन्दू शब्द का उल्लेख कुछ इस प्रकार से आता है ……..

“ओंकारमन्त्रमूलाढ्य पुनर्जन्म द्रढ़ाश्य:। गौभक्तो भारतगरुर्हिन्दुर्हिंसन दूषकः ।।

(अर्थात,  वो जो ओमकार को ईश्वरीय धुन माने कर्मों पर विश्वास करे, गौपालक रहे तथा बुराईयों को अपने आप से दूर रखे वही हिन्दू  कहलाता है ।)

केवल इतना ही नहीं हमारे ऋगवेद ( ८:२:४१ ) में विव हिन्दू नाम के बहुत ही पराक्रमी और दानी राजा का वर्णन मिलता है जिन्होंने 46000 गौमाता दान में दी थी, और ऋग्वेद मंडल में भी उनका वर्णन मिलता है।

ऋग वेद में एक ऋषि का उल्लेख विशेष कर आता है जिसपर ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि इनका नाम सैन्धव था जो मध्यकाल में क्रमशः आगे चलकर कालांतर में “हैन्दव/हिन्दव” नाम से प्रचलित हुआ, हिन्दू शब्द बाद में इसीके अपभ्रंश रूप में प्रचलित होता पाया गया है ।

इसके अतिरिक्त हमारे पुराणों तथा अन्य ग्रथों में भी कई स्थानों में हिन्दू शब्द की उत्पत्ति के बारे में भरपूर उल्लेख मिलता है जिससे हमें इस शब्द के अति प्राचीन रूप की जानकारी मिलती है ।

हिन्दू एक अप्रभंश शब्द है। ईरानी अर्थात पारस्य देश के पारसियों की धर्म पुस्तक ‘अवेस्ता’ में ‘हिन्दू’ और ‘आर्य’ शब्द का उल्लेख मिलता है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इस शब्द की उत्पति चीनी यात्री हुएनसांग के भ्रमण के समय हुई थी।

कुछ चीनी माताकारों के अनुसार  हिन्दू शब्द की उत्पत्ति इंदु शब्द से हुई थी । इंदु चंद्रमा का पर्यायवाची है। चीन के लोग भारतीयों को ‘इन्तु’ या ‘हिंदू’ के नाम से पुकारने लगे थे । यह चीनी परिकल्पना हमारे समस्त पौराणिक अभिलेखों को ध्यान में रखकर नहीं बनाई गई है ।

उपर्यूक्त परिदृश्य में इसलिये गर्व से कहो कि हम हिंदू है ।

जयति जय जय पूण्य भूमि,
हे भारत, हे भारती
जय हिन्द, जय हिन्दू
🚩 🚩 🚩 🚩 🚩 🚩 🚩 🚩

Leave A Reply

Your email address will not be published.